रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट (FSR) में उभरते बाजारों के लिए बढ़ते ऋण स्तर के जोखिमों के बारे में चिंता जताई है। नियामक की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल ऋण अब 2008 के दौरान देखे गए ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (GFC) से भी ज्यादा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ऋण सभी सेक्टर में बढ़ गया है और 2019 की दिसंबर तिमाही में 255 ट्रिलियन डॉलर हो गया था। 2008 में की शुरुआत के दौरान देखे गए ग्लोबल फाइनेंशिल क्राइसिस की तुलना में ग्लोबल ऋण वर्तमान में लगभग 40% या 87 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है, जो ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) 322% से ज्यादा है।
ग्लोबल इकॉनोमिक एक्टिविटी में 3% का कन्ट्रैक्शन होगा
आरबीआई की रिपोर्ट में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस (IIF) का हवाला देते हुए कहा गया है, कि अगर सरकार उधार लेती है तो इसका स्तर 2019 से दोगुना हो जाएगा और ग्लोबल इकॉनोमिक एक्टिविटी में 3% का कन्ट्रैक्शन होगा। इससे ढेर सारा कर्ज हो जाएगा और 2020 में जीडीपी 322% से बढ़कर 342% हो जाएगी।
बढ़ते वैश्विक ऋण स्तर से उभरते बाजार प्रभावित होंगे
बढ़ते वैश्विक ऋण स्तर से उभरते बाजार (ईएम) सबसे बुरी तरह से प्रभावित होंगे, जिन्होंने जीएफसी के बाद से अपनी वित्तीय देनदारियों में वृद्धि देखी है। आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में कहा गया है, "30 प्रमुख ईएमएस का ऋण 2007 के क्वार्टर 4 में 22 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2019 के क्वार्टर 4 में 71 ट्रिलियन डॉलर हो गया है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 के आखिर में रिपेमेंट के कारण 20 ट्रिलियन डॉलर के बॉन्ड और ऋण में गिरावट आएगी, ईएमएस को 4.3 ट्रिलियन डॉलर चुकाने होंगे।
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