देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी और बाजार की निवेशक एलआईसी ने अपने आईपीओ में एक कदम और आगे बढ़ा लिया है। कंपनी ने इनवेस्टमेंट बैंक सिटी ग्रुप, एडलवाइस, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, डेलॉय और क्रेडिट सुइस को मर्चेंट बैंकर्स के रूप में चुना है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।
इसी वित्त वर्ष में आईपीओ आने की संभावना
जानकारी के मुताबिक उपरोक्त पांचों बैंकर्स के नाम सोमवार को चुने गए हैं। इससे पहले इन बैंकर्स ने टेक्निकल बिड्स का प्रजेंटेशन किया था। अब फाइनेंशियल बिड्स के लिए गुरुवार को नामों का चयन होगा। कुल 11 कंपनियों में से इन पांच के नामों को चुना गया है। फाइनेंशियल बिड्स के बाद दो नामों को अंत में प्री आईपीओ के लिए चुना जाएगा। कहा जा रहा है कि एलआईसी किसी भी तरह से इसी वित्त वर्ष में आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है।
हालांकि इसके लिए उसे कई तरह के बदलावों का सामना भी करना पड़ेगा। इसमें उसके एक्ट से लेकर कैबिनेट की मंजूरी तक शामिल होगी। कंपनी जल्द ही अपने वैल्यूएशन और डील के स्ट्रक्चर को लेकर भी काम करेगी।
34 लाख करोड़ रुपए की है असेट्स
बता दें कि इस पूरी प्रक्रिया को सरकार का डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक असेट मैनेजमेंट (दीपम) देख रहा है। दीपम वित्त मंत्रालय के तहत आता है। इसी ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया था। आईपीओ लाने से पहले सरकार को इंश्योरेंस एक्ट को सुधारना होगा। देश में कुल 24 जीवन बीमा कंपनियों में से एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020 में 69 प्रतिशत रही है। इसका फर्स्ट ईयर प्रीमियम 1.78 लाख करोड़ रुपए रहा है। कंपनी में सरकार की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी के पास 34 लाख करोड़ रुपए की असेट्स है।
सालाना 2 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश
एलआईसी के पास कुल करीबन 34 करोड़ पॉलिसियां हैं। इसमें इंडिविजुअल और ग्रुप दोनों का समावेश है। हालांकि देश में 23 निजी सेक्टर की बीमा कंपनियों के 20 साल के बाद भी एलआईसी अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखी है। प्रीमियम और पॉलिसी दोनों के मामलों में यह कंपनी नंबर वन है। सालाना यह दो लाख करोड़ का निवेश करती है। इसमें से 50-60 हजार करोड रुपए शेयर बाजार में निवेश किया जाता है।
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