भारत का तेल आयात जून में पिछले 9 साल में सबसे कम रहा, जून 2009 के बाद पहली बार वेनेजुएला से तेल आयात नहीं किया
भारत का तेल आयात जून में गिर गया, जो अक्टूबर 2011 के बाद यानी 9 सालों में सबसे कम रहा। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों से मिले डेटा के मुताबिक, रिफाइनर ने मेंटेनेंस टर्नअराउंड और कमजोर फ्यूल डिमांड के कारण खरीदारी पर अंकुश लगा दिया।
भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर और इम्पोर्टर है। उसने जून में प्रति दिन 3.2 मिलियन बैरल (बीपीडी) तेल प्राप्त किया, जो मई की तुलना में 0.4% और एक साल पहले के की तुलना में लगभग 28.5% की गिरावट थी। पिछले महीने, जून 2009 के बाद पहली बार भारत ने वेनेजुएला से तेल का आयात नहीं किया।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन सहित देश के टॉप रिफाइनर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के संचालक और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने मेंटेनेंस के लिए यूनिट को बंद करने की योजना बनाई है।
भारत में आम तौर पर जून से शुरू होने वाले चार महीने के मानसून सीजन के दौरान ईंधन की मांग कम हो जाती है, क्योंकि बारिश की वजह से कंस्ट्रक्शन और ट्रांस्पोर्टेशन प्रभावित होता है।
पहली छमाही में देश के कुछ हिस्सों में कोरोनोवायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के चलते ईंधन की मांग और हाई रिटेल प्राइस में कमी आई है।
जून में दो महीने के अंतराल के बाद इराक ने सऊदी अरब को टॉप ऑयल सप्लायर से बदल दिया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात और नाइजीरिया ने तीसरे और चौथे स्लॉट को बरकरार रखा। संयुक्त राज्य अमेरिका पांचवें स्थान पर था।

भारत में मध्य पूर्व से तेल का आयात जून में बढ़कर सात महीने के उच्च स्तर 67.12% हो गया, जबकि लैटिन अमेरिका से आयात 11 वर्षों में सबसे कम हो गया, क्योंकि भारत ने वेनेजुएला के तेल का आयात नहीं किया था जो अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा था।
निजी रिफाइनर नायरा एनर्जी ने वेनेजुएला से आयात रोक दिया है, जबकि रिलायंस ने डीजल के बदले में ओपेक सदस्य से आयात फिर से शुरू करने की अमेरिका से अनुमति ली है।
भारत के तेल आयात में ओपेक की हिस्सेदारी जून में पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई।

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