पैसेंजर व्हीकल की खुदरा बिक्री अगस्त में 7% घटी, सभी वाहनों की कुल बिक्री पिछले साल के मुकाबले करीब 27% कम रही
फेस्टिव सीजन नजदीक आने के बावजूद वाहन बाजार में अभी तक फुल रिकवरी नहीं आ पाई है। ऑटोमोबाइल डीलर्स के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) के प्रेसिडेंट विंकेश गुलाटी ने कहा कि वाहनों की बिक्री अभी भी पिछले साल के मुकाबले करीब 70-75 फीसदी के स्तर तक पहुंच पाई है। करीब डेढ़ महीने बाद नवरात्रि के साथ भारत में फेस्टिव सीजन शुरू होने जा रहा है।
फाडा ने बुधवार को कहा कि अगस्त में पैसेंजर व्हीकल्स का रिटेल सेल एक साल पहले की समान तिमाही की तुलना में 7.12 फीसदी घटकर 1,78,513 यूनिट्स रह गया। अगस्त 2019 में 1,92,189 यूनिट्स पैसेंजर व्हीकल्स बिके थे। टू-व्हीलर्स की बिक्री पिछले माह 28.71 फीसदी घटकर 8,98,775 यूनिट्स रही, जो एक साल पहले समान महीने में 12,60,722 यूनिट्स थी।
कमर्शियल व्हीकल की बिक्री 57.39% और थ्री-व्हीलर्स की बक्री 69.51% गिरी
कमर्शियल व्हीकल की बिक्री 57.39 फीसदी घटकर 26,536 यूनिट्स रह गई, जो एक साल पहले समान अवधि में 62,270 यूनिट्स थी। थ्री-व्हीलर्स की बक्री 69.51 फीसदी घटकर 16,857 यूनिट्स रही, जो एक साल पहले समान अवधि में 55,293 यूनिट्स थी। सभी प्रकार के वाहनों की कुल बिक्री अगस्त में 26.81 फीसदी घटकर 11,88,087 यूनिट्स रही, जो एक साल पहले की समान अवधि में 16,23,218 यूनिट्स थी।
जुलाई के मुकाबले अगस्त में ज्यादा बिक्री
फाडा के प्रेसिडेंट विंकेश गुलाटी ने कहा कि फेस्टिव सीजन की शुरुआत और लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था को खोलने की निरंतर चल रही प्रक्रिया के कारण अगस्त 2020 में जुलाई 2020 के मुकाबले वाहनों की ज्यादा बिक्री हुई। हालांकि एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले बिक्री घटी है। सिर्फ ट्रैक्टर की बिक्री एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले बढ़ी है।
कम कीमत वाले पैसेंजर व्हीकल्स की अधिक खरीदारी
गुलाटी ने कहा कि असमंजस में बैठे ग्राहकों ने आखिरकार जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी के दौरान वाहनों की खरीदारी कर ली। कोरोनावायरस के मामले में कमी नहीं आने के कारण कम कीमत वाले पैसेंजर व्हीकल्स की अधिक खरीदारी हो रही है। शहरी क्षेत्रों में भी रिकवरी दिखने लगी है।
वाहनों की फाइनेंसिंग से डर रहे हैं बैंक व एनबीएफसी
कुल मांग हालांकि अभी भी कोरोनावायरस से पहले वाली स्थिति तक नहीं पहुंच पाई है। इसका कारण यह है कि बैंक और एनबीएफसी वाहनों को फाइनेंस करने से कतरा रहे हैं। खासकर वे कमर्शियल वाहनों को फाइनेंस नहीं करना चाहते हैं।
फेस्टिव सीजन के कारण इन्वेंटरी बढ़ा रही हैं कंपनियां
उन्होंने कहा कि आगामी फेस्टिव सीजन को देखते हुए ऑटो कंपनियां डीलर्स के पास वाहनों का स्टॉक जमा कर रही हैं। खुदरा बिक्री हालांकि अब भी पिछले साल के मुकाबले 70-75 फीसदी के स्तर पर हो रही है। फाडा ने कंपनियों और डीलर्स को सुझाव दिया है कि वे जरूरत से ज्यादा इन्वेंटरी खड़ा न कर लें, वरना ब्याज की लागत बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी और डीलरशिप के बंद होने का खतरा बढ़ जाएगा।
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