पिछली बार लॉकडाउन के कारण क्रूड में गिरावट का लाभ उठाने से चूक गए थे कई सेक्टर, इस बार फायदा उठाने का है बड़ा मौका
विश्लेषकों के मुताबिक तेल मार्केटिंग, पेंट, टायर, स्पेशियल्टी केमिकल, प्लास्टिक पाइपिंग, एविएशन और सीमेंट जैसी कंपनियों को क्रूड में गिरावट का सीधा फायदा मिलता है। ये सेक्टर अपने उत्पाद और सेवाओं में क्रूड का इस्तेमाल करते हैं। पिछली बार जब क्रूड गिरा था, तो इसका लाभ ये सेक्टर ठीक से नहीं उठा पाए थे, क्योंकि ये सेक्टर लॉकडाउन में बंद पड़े हुए थे। लेकिन इस बार यदि क्रूड में बड़ी गिरावट होती है, तो इन सेक्टरों को भारी फायदा होगा, क्योंकि अब लॉकडाउन खत्म कर दिया गया है और कारोबारी गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं।
यदि एयरलाइंस का उदाहरण लिया जाए, तो पिछली बार ब्रेंट के गिरकर 15 डॉलर तक चले जाने का लाभ भी एयरलाइसं नहीं उठा पाईं, क्योंकि उनका परिचालन बंद पड़ा हुआ था। लेकिन अभी स्थिति बदल गई है। एयरलाइंस कंपनियों का डोमेस्टिक परिचालन शुरू हो चुका है। ऐसे में यदि क्रूड गिरता है, तो इससे एयरलाइंस कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा।
सरकार को वित्तीय घाटा कम करने में मिलेगी मदद
क्रूड में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अच्छा माना जाता है। भारत अपनी करीब 85 फीसदी तेल जरूरत की पूर्ति आयात से करता है। क्रूड में गिरावट से भारत को वित्तीय घाटा कम करने में मदद मिलेगी। क्रूड ऑयल सस्ता होगा तो रसोई गैस पर सरकार का सब्सिडी खर्च भी कम होगा। पेट्रो व डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने से सरकार की कमाई भी बढ़ सकती है। सालाना आधार पर क्रूड में प्रति बैरल 10 डॉलर की गिरावट होने से देश का चालू खाता घाटा 15 अरब डॉलर कम हो जाता है।
मंगलवार को ब्रेंट क्रूड गिरकर 40 डॉलर के नीचे आ गया था
ब्रेंट क्रूड में गत एक सप्ताह में 8 फीसदी की गिरावट आई है। तीन सितंबर को ब्रट 44.07 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बुधवार को यह 2.89 फीसदी उछलकर 40.94 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। इस बीच डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.31 फीसदी उछाल के साथ 38.06 डॉलर प्रति बैरल पर ट्र्रेड कर रहा था। मंगलवार को 25 जून के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 40 डॉलर के नीचे आया गया था। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 5.43 फीसदी गिरकर 39.73 डॉलर तक आ गया था।
एमसीएक्स पर क्रूड ऑयल का भाव करीब 4 महीने के निचले स्तर तक आया
मंगलवार की भारी गिरावट के बाद क्रूड बुधवार को संभल गया7 बुधवार को एमसीएक्स पर क्रूड ऑयल का 21 सितंबर का कांट्रैक्ट 0.85 फीसदी मजबूत होकर 2,728 रुपए प्रति बैरल पर बंद हुआ। इंट्राडे ट्रेड में इसने 2,675 का निचला स्तर छूआ। यह 19 मई के बाद का निचला स्तर है, जब यह 2,611 रुपए पर बंद हुआ था। मंगलववार को यह 2,705 रुपए पर बंद हुआ था।
क्रूड में क्यों आई है गिरावट
क्रूड में गिरावट का रुझान पैदा होने का मतलब यह है कि बाजार में मांग उतनी नहीं है, जितनी आपूर्ति हो रही है। इसका मतलब यह है कि पूरी दुनिया में औद्योगिक गतिविधियां अब भी कोरोनावायरस महामारी से उबर नहीं पाई है। दुनियाभर में कोरोनावायरस के संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है और ठंड का मौसम सामने होने के कारण आने वाले महीनों में संक्रमण में और तेजी से बढ़ोतरी होने की आशंका पैदा हो गई है। संक्रमण बढ़ेगा तो क्रूड की मांग और घटेगी। इसलिए क्रूड में हाल में गिरावट देखी जा रही है। रविवार 6 सितंबर को सऊदी अरब द्वारा अपने तेल की कीमत घटाए जाने से भी ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड में गिरावट को बल मिला।
इस साल कोरोनावारयरस संक्रमण के कारण क्रूड में शुरू हुआ था गिरावट का ट्रेंड
संक्रमण फैलने से पहले 30 दिसंबर 2019 को 68.60 डॉलर प्रति बैरल पर था क्रूड। चीन में दिसंबर के बाद कोरोनावायरस महामारी की रोकथाम के कारण औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियां बंद करने से मांग में की आनी शुरू हुई और इसी के साथ क्रूड का भाव भी गिरने लगा। दो मार्च को यह 45.27 डॉलर पर आ गया। 31 दिसंबर के प्राइस के मुकाबले ब्रेंट क्रूड अभी करीब 40 फीसदी नीचे है।
उत्पादन कटौती का समझौता टूटने से क्रूड में आई थी ऐतिहासिक गिरावट
इस बीच सऊदी अरब और रूस सहित ओपेक प्लस देशों के बीच उत्पादन कटौती का समझौता टूटने के बाद सऊदी अरब ने अपने तेल की कीमत घटाकर एकतरफा प्राइस वार शुरू कर दिया। इसके बाद 9 मार्च को ब्रेंट क्रूड करीब 27 फीसदी गिरकर 33.85 डॉलर पर आ गया। गिरावट का सिलसिला यहां भी नहीं थमा।
डब्ल्यूटीआई टूटकर शून्य से 40 डॉलर नीचे चला गया
इस बीच अमेरिका में क्रूड की मांग इतनी घटी की डब्ल्यूटीआई क्रूड को रखने के लिए जगह नहीं बची। कंपनियों को डॉलर देकर क्रूड निकालना पड़ा। इसके कारण मध्य अप्रैल में डब्ल्यूटीआई क्रूड का वायदा भाव शून्य से 40.32 डॉलर नीचे चला गया। इसके दबाव में ब्रेंट क्रूड ने भी 15.98 डॉलर का निचला स्तर छू लिया।
उत्पादन कटौती का समझौता होने के बाद संभला क्रूड
इस बीच तेल उत्पादक देशों के बीच उत्पादन कटौती का समझौता हो गया। इसके बाद क्रूड में मजबूती आनी शुरू हो गई। तब से क्रूड लगातार मजबूत हो रहा था।
सऊदी अरब ने अपने तेल की कीमत घटाई, जून के बाद एशिया के लिए प्राइस में पहली कटौती
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