सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2012-13 से 2019-20 के दौरान आठ सालों में 47,310 करोड़ रुपए के बैड लोन को राइट ऑफ किया है। जबकि इस अवधि में रिकवरी 19 फीसदी यानी 8901 करोड़ रुपए रही है। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मिले डाटा से यह जानकारी सामने आई है।
बड़े डिफाल्टर्स की जानकारी देने से इनकार
RTI के तहत, बैंक से 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के डिफाल्टर्स की जानकारी भी मांगी गई थी। लेकिन अन्य PSBs की तर्ज पर केनरा बैंक ने भी बड़े डिफाल्टर्स की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। बैंक ने RTI के जवाब में कहा है कि यह निजी सूचना से जुड़ा मामला है और इसका सार्वजनिक हित से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में RTI एक्ट के सेक्शन 8(1)(j) के तहत इसका जवाब नहीं दिया जा सकता है।
क्या होता है राइट ऑफ?
जब लोन की रिकवरी नहीं हो पाती है तो बैंक उसे नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) घोषित कर देता है। ज्यादा एनपीए से बैंक की बैलेंसशीट गड़बड़ा जाती है। इस गड़बड़ी को ठीक करने के लिए बैंक कभी ना वसूले जा सकने वाले लोन को राइट ऑफ कर देते हैं। राइट ऑफ करने से लोन बैलेंस शीट से हट जाता है। राइट ऑफ को सामान्य भाषा में बट्टा खाता भी बोला जाता है।
SBI ने 2012 से 2020 तक 1.23 लाख करोड़ का कर्ज राइट ऑफ किया
एक अन्य RTI के मुताबिक, देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 2012 से 2020 के दौरान एक लाख 23 हजार 432 करोड़ रुपए का कर्ज राइट ऑफ किया है। 31 मार्च 2020 तक इसमें से केवल 8,969 करोड़ रुपए की वसूली हुई है। यानी 7.26 फीसदी। बाकी की रकम की वसूली आज तक नहीं हो पाई है। एसबीआई के बड़े कर्जदारों में वीडियोकॉन, आलोक इंडस्ट्रीज और भूषण स्टील जैसी कंपनियां शामिल हैं।
राइट ऑफ अमूमन 100 करोड़ से ऊपर का कर्ज होता है
बैंक बड़े कर्जदारों के कर्ज को राइट ऑफ करते हैं। यह राइट ऑफ 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज को किया जाता है। पिछले कुछ समय में देश में ऐसे सैकड़ों कर्जदार हैं जिन्होंने बैंकों से 100 करोड़ से ज्यादा का कर्ज लिया है। बाद में जब वसूली नहीं हुई तो उन्हें बैंकों ने राइट ऑफ कर दिया।
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