अरब देशों से एलपीजी खरीद की निर्भरता कम करेंगी भारतीय कंपनियां, 8 लाख टन के लिए बिड मंगाई

लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के भारतीय खरीदार कंपनियां मिडिल ईस्ट से सप्लाई के लिहाज से अपनी निर्भरता घटाने की योजना पर काम कर रही हैं। इसकी बड़ी वजह पिछले साल की दो घटनाएं हैं। पहली सऊदी अरब के फ्यूल एरिया में ड्रोन हमला और दूसरी चीन-यूएस के बीच ट्रेड वार। दोनों घटनाओं के कारण सप्लाई प्रभावित हुई थी। इसके अलावा भारतीय कंपनियों को ऊंची कीमतों पर डील करनी पड़ी थी। इन्हीं घटनाओं से कंपनियों ने सबक लेते हुए यह फैसला लिया है।

8 लाख टन के लिए बिड मंगाई

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) 2021 में अपनी एलपीजी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल सप्लायर्स से बिड मांगी है। यह बिड करीब 8 लाख टन के लिए होगी, जो सालाना इंपोर्ट की आवश्यकता का पांचवां हिस्सा है। सालाना इंपोर्ट लगभग 40 लाख टन का है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बिड अभी भी मिडिल ईस्ट उन गैस प्रोड्यूसर्स के लिए खुली है, जो पहले से ही बीपीसीएल को कॉन्ट्रैक्ट के तहत फ्यूल उपलब्ध कराती रही हैं।

मिडिल ईस्ट से सप्लाई

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, नए टेंडर का उद्देश्य मिडिल ईस्ट और एलपीजी के अन्य स्रोतों के बीच अच्छे भाव पर सप्लाई प्राप्त करना है। दरअसल, भारत के फ्यूल रिटेलर ज्यादातर एलपीजी को सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत जैसे देशों से खरीदते हैं। लेकिन आए दिन इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिससे सप्लाई प्रभावित होता है।

पिछले साल की घटनाओं ने किया प्रभावित

इसके अलावा पिछले साल फेस्टिव सीजन के ठीक पहले सऊदी अरब के फ्यूल एरिया में ड्रोन हमला हुआ था। अमेरिका और चीन के मध्य ट्रेड वार भी चरम रहा। इन दोनों घटनाओं से सप्लाई प्रभावित हुई थी। क्योंकि ट्रेड वार के दौरान चीन ने अमेरिका से फ्यूल इंपोर्ट करना बंद कर दिया था। इससे भारत को फारस की खाड़ी से एलपीजी लेने के लिए ऊंची कीमतों भुगतान करना पड़ा था।

फैसले से होगा फायदा

एफजीई के जेसलिन चुआ कहती हैं कि भारत का यह रवैया तार्किक है। क्योंकि अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता है तो भारत को अलग-अलग एलपीजी स्रोतों से सप्लाई फायदेमंद साबित होगा। हालांकि, बीपीसीएल के लिए मिडिल ईस्ट एक बेहतर विकल्प है। क्योंकि भारत से अरब देशों के बीच की दूरी बेहद कम है। इससे शिपिंग कॉस्ट कम भी होगा। बजाय इसके की भारत, अमेरिका और यूरोप के देशों से सप्लाई करे। क्योंकि भारत और यूरोप या अमेरिका के बीच लंबी दूरी के कारण शिपिंग कॉस्ट महंगा पड़ेगा।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, एलपीजी ने भारत में ऑयल प्रोडक्ट्स के लिए डिमांड का दायरा कम कर दिया है। हालांकि, एफजीई की चुआ कहती हैं कि फ्यूल का इंपोर्ट अगले साल 16 मिलियन से बढ़कर 16.6 मिलियन हो जाएगा।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
India Saudi Arabia | Middle East Unrest: India Bharat Petroleum LPG Procurement From Arab Countries , Qatar, UAE and Kuwait


To Contact Insurance and Investment Expert
Thanks for reading. Please Share, Comment, Like the post And Follow, Subscribe Insurance and Investment News
from Source
अरब देशों से एलपीजी खरीद की निर्भरता कम करेंगी भारतीय कंपनियां, 8 लाख टन के लिए बिड मंगाई अरब देशों से एलपीजी खरीद की निर्भरता कम करेंगी भारतीय कंपनियां, 8 लाख टन के लिए बिड मंगाई Reviewed by Insurance Advisor on October 16, 2020 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.