कोरोना महामारी के कारण देश में छाई आर्थिक मंदी का असर सोने की मांग पर भी पड़ा है। इसी का नतीजा है कि देश में सोने का आयात (इंपोर्ट) अप्रैल-नवंबर के दौरान 40% घटकर 12.3 अरब डॉलर (90 हजार करोड़ रुपए) रह गया। गोल्ड इंपोर्ट का असर चालू खाते के घाटे (करंट अकाउंट डेफिसिट) पर पड़ता है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार पिछले वित्त वर्ष 2019-20 की इसी अवधि में इस गोल्ड का आयात 20.6 अरब डॉलर (1.5 लाख करोड़ रुपए) का था।
चांदी की मांग भी घटी
चांदी का आयात भी अप्रैल-नवंबर अवधि के दौरान 65.7% घटकर 75.2 करोड़ डॉलर (5535 हजार करोड़ रुपए) रहा। सोने- चांदी के आयात में गिरावट से देश का व्यापार घाटा (आयात एवं निर्यात का अंतर) 2020-21 के अप्रैल-नवंबर में 42 अरब डॉलर (3 लाख करोड़ रुपए) तक सीमित रहा। एक साल पहले इसी अवधि में यह 113.42 अरब डॉलर (8.3 लाख करोड़ रुपए) था।
पहले 6 महीनों में 57% की गिरावट रही थी
चालू वित्त वर्ष के पहले 6 महीनों में सोने के आयात में 57% की गिरावट रही थी। डाटा के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2020 के बीच 6 महीनों में 6.8 बिलियन डॉलर करीब 50 हजार करोड़ रुपए के सोने का आयात हुआ था। एक साल पहले समान अवधि में 15.8 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.10 लाख करोड़ रुपए का आयात हुआ था। सोना करंट अकाउंट डेफिसिट का मुख्य भागीदार है।
भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक
भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक देश है और इसकी सबसे ज्यादा मांग ज्वैलरी इंडस्ट्री में रहती है। सामान्य तौर पर देश में हर साल 800 से 900 टन सोने का आयात होता है। चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में जेम्स एंड ज्वैलरी का निर्यात 44% घटकर 14.30 अरब डॉलर रहा।
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