केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार के खिलाफ टैक्स विवाद मामले को जीत लिया है। एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में यह मामला चल रहा था। इसी के साथ देश का सबसे हाई प्रोफाइल विवाद अब समाप्त हो गया है। इससे पहले भारत सरकार के ही खिलाफ वोडाफोन ने भी इसी तरह के टैक्स के मामले में जीत हासिल की थी। वोडाफोन का मामला 20 हजार करोड़ रुपए का था।
मार्च 2015 में मामला दायर किया था
केयर्न ने मार्च 2015 में भारत के टैक्स डिपार्टमेंट के 1.6 अरब डॉलर से अधिक की डिमांड के खिलाफ औपचारिक विवाद दायर किया था। यह टैक्स विवाद 2007 में उस समय इसके भारतीय ऑपरेशन की लिस्टिंग से संबंधित था। केयर्न ने इस फैसले पर हालांकि कोई टिप्पणी नहीं की है। साथ ही भारत सरकार की ओर से भी कोई बयान नहीं आया है।
7500 करोड़ रुपए का था मामला
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को ऊर्जा कंपनी को 7500 करोड़ रुपए से अधिक का पेमेंट देना था। क्योंकि उसने केयर्न को डिविडेंड के शेयरों को देने से इनकार करते हुए राशि जब्त कर ली थी। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वेदांता के साथ अपने विलय के बाद केयर्न इंडिया में कंपनी के हिस्से के अवशिष्ट शेयरों (residual shares) को समाप्त कर दिया था।
वोडाफोन का 20 हजार करोड़ का मामला
भारत पहले से ही 20,000 करोड़ रुपए से अधिक की रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स डिमांड को लेकर वोडाफोन ग्रुप के खिलाफ आर्बिट्रेशन मामले में हुए नुकसान पर विकल्पों को तलाश रहा है। इन विकल्पों में हेग में परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) द्वारा कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। इसके बाद वोडाफोन के साथ अपने टैक्स विवाद को निपटाने के लिए 2012 के नियमों को संशोधन कर वापस एक नया कानून भी लाया गया है।
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