वैश्विक एयरलाइन कंपनियों ने मंगलवार को कहा कि कोरोनावायरस महामारी से उद्योग को बाहर निकलने में और लंबा वक्त लग जाएगा। कंपनियों ने कहा कि पैसेंजर ट्र्रैफिक 2024 तक कोरोनावायरस महामारी से पहले वाले स्तर पर आ पाएगा। इससे पहले जारी हुए अनुमान में कंपनियों ने कहा था कि 2023 तक हवाई ट्रैफिक कोरोनावायरस महामारी से पहले वाले स्तर पर वापस आ पाएगा।
महामारी की रोकथाम की धीमी रफ्तार के कारण उद्योग को संकट से निकलने में लगेगा ज्यादा वक्त
इंटरनेशनल एयर ट्र्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) ने एक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका व विकासशील देशों में कोरोनावायरस की रोकथाम की रफ्तार धीमी है और कॉरपोरेट ट्र्रैवल में जल्द तेजी आने के आसार नहीं हैं। कई बाजारों में पाबंदियां अब भी लगी हुई हैं इससे भी निकट अवधि का अनुमान प्रभावित हो रहा है। आईएटीए के मुताबिक 2020 में हवाई यात्रियों की संख्या में सालाना आधार पर 55 फीसदी की गिरावट आ सकती है। पहले जारी किए गए अनुमान में इस साल हवाई यात्रियों की संख्या में 46 फीसदी गिरावट आने की आशंका जताई गई थी।
जून में हवाई यात्रियों की संख्या 86.5 फीसदी कम रही थी
जून में हवाई यात्रियों की संख्या में सालाना आधार पर 86.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। इससे भी पहले मई में यात्रियों संख्या में एक साल पहले के आंकड़े के मुकाबले 91 फीसदी की गिरावट रही थी। आईएटीए ने कहा कि अमेरिका और विकासशील देशों में कोरोनावायरस महामारी फैलते जाने से यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना काफी कम दिख रही है। पूरी दुनिया के हवाई यात्रियों की संख्या में इन बाजारों का योगदान 40 फीसदी है।
वायरस टेस्टिंग के सस्ते विकल्प से बढ़ेगा एयर ट्र्रैफिक
एशिया पैसेफिक एयरलाइंस के महानिदेशक सुभाष मेनन ने कहा कि जब तक वायरस की टेस्टिंग का कोई सस्ता और सबको स्वीकार्य विकल्प सामने नहीं आ जाता, तब तक हवाई यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि टेस्ट करने की प्रक्रिया में खर्च कम होगा, तक यात्री इसका खर्च उठाना चाहेंगे। अभी इसकी लागत काफी ज्यादा है।
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