प.बंगाल में लाॅकडाउन में भी खूब बिकी मछली, सब्जी से ज्यादा रही डिमांड, हर दिन हो रही है 5 हजार मैट्रिक टन मछली की बिक्री

बंगाल और मछली का कनेक्शन कितना मजबूत है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि कोरोनावायरस और लॉकडाउन में भी इस पर कोई असर नहीं पड़ा है। कोरोना महामारी की शुरूआत में सी फूड को लेकर लोगों में भय था। उस वक्त भी पश्चिम बंगाल के मार्केट्स में मछलियों की डिमांड थी क्योंकि लॉकडाउन में बिक्री पहले की तरह रही है। इन दिनों रोजाना 5 हजार मैट्रिक टन मछली की बिक्री हो रही है। वहीं, सी फिश की रोजाना बिक्री 500 मैट्रिक टन हो रही है। पश्चिम बंगाल सरकार के मार्केटिंग कमिटी टास्क फोर्स के मुताबिक, पिछले साल भी लगभग ऐसा ही आंकड़ा था।

सालाना 19 लाख मैट्रिक टन मछली की खपत होती है

पश्चिम बंगाल सरकार के मार्केटिंग कमिटी के टास्क फोर्स मेंबर, रवीन्द्र चंद कोले ने मनी भास्कर से बातचीत में बताया कि बंगाल में सालाना 19 लाख मैट्रिक टन मछली की खपत होती है। इसमें सभी तरह की मछलियों की मांग साल भर रहती है। इस साल लॉकडाउन के बावजूद बिक्री में कोई कमी नहीं है। हर साल की तरह इस साल भी अच्छी बिक्री अच्छी हो रही है। हर माह करीब डेढ़ लाख मैट्रिक टन फिश की सेल हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा रोहू और कतला मछली की डिमांड रहती है। इसकी कीमत 150-200 रुपए प्रति किलो के आसपास है।

बंगाल में आंध्र प्रदेश और ओडिशा से आती है मछली

कोले ने बताया कि प.बंगाल में करीब 10 लाख मैट्रिक टन कल्चर फिश का उत्पाद होता है। वहीं, कैप्चर फिश यानी कि समुद्री फिश का उत्पादन 2.5 लाख मैट्रिक टन है। कुल मिलाकर बंगाल में करीब 12.5 लाख मैट्रिक टन के आसपास फिश का उत्पाद होता है। इसके अलावा पं. बंगाल में आंध्र प्रदेश और ओडिशा से भी फिश मंगवाई जाती है। वहीं बंगाल से दुनियाभर में फिश की सप्लाई होती है। यहां से ज्यादातर केरला, मुंबई, दिल्ली, कर्नाटक, चीन, कोरिया जैसे शहरों में फिश भेजा जाता है। कोले ने बताया कि ममता बनर्जी सरकार की जल संरक्षण के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना 'जल धरो, जल भरो' के तहत हाल ही में करीब 1 लाख तालाब खोदा गया है इससे भी फिश प्रोडक्शन में मदद मिली है।

पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 5-7 फीसदी कमी रही

बंगाल में कैप्चर और कल्चर फिश फिश की बड़ी-छोटी, और हाट मिलाकर कुल 10,000 दुकानें हैं। इनमें 400 मार्केट कोलकाता नगर निगम के अंतर्गत आती हैं। इस साल मछली का उत्पादन अच्छा रहा है। इस वजह से कीमत में ज्यादा उछाल नहीं देखने को मिली है। 25 मार्च से 15 जून यानी लॉकडाउन के दौरान 75-80 फीसदी सेल हुई है। वहीं, सब्जी की सेल 50 फीसदी ही रही। ऐसे में मछली की सेल में लॉकडाउन और कोरोना का भी असर नहीं दिखा है। हालांकि, मार्च में मार्केट बंद होने के कारण बिक्री में 8-10 प्रतिशत की कमी आई थी लेकिन अप्रैल मध्य तक रिकवरी हो गई।
कोलकाता के मछली कारोबारी मिंटू साव ने बताया कि अप्रैल और जून तक 100 फीसदी बिक्री हुई है। पिछले साल के मुकाबले इस साल 30 फीसदी दाम कम है। ऐसे में डिमांड में तेजी है। आपूर्ति में कहीं कोई कमी नहीं है।

2.5 लाख मैट्रिक टन के आसपास है सी फिश का उत्पादन

दीघा संकरपुर फिशरमैन एंड फिश ट्रेडर्स एसोसिएशन सेक्रेटरी, श्याम सुंदर दास के मुताबिक, बंगाल में कुल 2.3 लाख मैट्रिक टन के आसपास सी फूड का उत्पादन होता है। इसमें 40% सी फिश विदेश भेजा जाता है। वहां के रेस्त्रां व होटल्स में इसकी डिमांड ज्यादा रहती है। वहीं 50 फीसदी सी फिश दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों के फाइव स्टार होटल व रेस्त्रां जाता है। बंगाल में रोजाना 500 मैट्रिक टन सी फिश की बिक्री होती है। इससे हर दिन 6-7 करोड़ के आसपास का कारोबार होता है। दास बताते हैं कि सी फिश काफी महंगी होती है और लॉकडाउन के कारण होटल्स व रेस्त्रां का कारोबार डाउन चल रहा है इस वजह से इसकी मांग में कमी देखी गई है। पिछले तीन माह में सी फिश की सेल में करीब 20 फीसदी गिरावट आई है।

एक सी फिश की कीमत 50 हजार रुपए तक

सी फिश में सबसे महंगी फिश टेलिया होती है। इस फिश के तीन वर्जन हैं- फीमेल, मेल और काॅमन। इनमें सबसे ज्यादा डिमांड टेलिया के काॅमन वर्जन का है। इसका उत्पादन सिर्फ विंटर सीजन में होता है। इसका एक्सपोर्ट चीन और कोरिया में होता है। दास ने बताया कि बंगाल में हर साल मात्र 10 से 15 पीस ही टेलिया फिश का उत्पादन होता है। भारत में इसकी कीमत 50 हजार रुपए तक होती है। डिमांड इसलिए भी अधिक होती है क्योंकि यह मेडिसिन के तौर पर काफी कारगर माना गया है इसकी कीमत फिशामा यानी कि पूटी की वैल्यू के आधार पर किया जाता है।

भारत दूसरा सबसे ज्यादा फिश प्रोडक्शन करने वाला देश है

नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के मुताबिक, भारत दूसरा सबसे ज्यादा फिश प्रोडक्शन करने वाला देश है। दुनियाभर में फिशरीज के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है। इस सेक्टर से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 1.4 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। एग्री जीडीपी में इस सेक्टर का 5.23 प्रतिशत योगदान है। यहां प्रति व्यक्ति मछली की उपलब्धता 9 किलोग्राम है। भारत से फिश का सलाना निर्यात 45106 करोड़ रुपए के आसपास होता है।



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covid-19 There is no effect of corona on fish market in Kolkata, fish also sold in lockdown, demand more than vegetable


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प.बंगाल में लाॅकडाउन में भी खूब बिकी मछली, सब्जी से ज्यादा रही डिमांड, हर दिन हो रही है 5 हजार मैट्रिक टन मछली की बिक्री प.बंगाल में लाॅकडाउन में भी खूब बिकी मछली, सब्जी से ज्यादा रही डिमांड, हर दिन हो रही है 5 हजार मैट्रिक टन मछली की बिक्री Reviewed by Insurance Advisor on July 26, 2020 Rating: 5

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