कोरोना के कारण बिगड़े भारतीय बैंकों का हाल सुधरने में 3 साल या उससे अधिक वक्त लग सकता है। रिकवरी के मामले में भारत अन्य देशों के मुकाबले सबसे नीचे रहेगा। बैंकिंग सिस्टम पर यह अनुमान रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने दिया है। एजेंसी ने भारतीय बैंकों और नॉन- बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीच्यूशन (NBFI) के लिए नेगेटिव रेटिंग दी है, क्योंकि कोरोना के कारण पैदा हुई स्थितियों से बैंकों का ऑपरेशन धीमा हुआ है।
रिकवरी में लग सकता है 3 साल या उससे अधिक वक्त
एजेंसी द्वारा रिपोर्ट में कहा गया है कि रिकवरी में 2023 या उससे अधिक वक्त लग सकता है। इसमें भारत सहित अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का बैंकिंग सिस्टम भी शामिल है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और रूस शामिल हैं। जबकि चीन, कनाडा, सिंगापुर, हांगकांग, साउथ कोरिया और सऊदी अरब जैसों देशों की बैंकिंग सिस्टम 2020 के पहले ही रिकवर हो जाएगी।
वहीं, भारत, मैक्सिको और साउथ अफ्रीका में कोविड-19 स्तर की रिकवरी के लिए 2023 तक इंतजार करना पड़ सकता है। कोरोना के कारण बिगड़ी बैंकिंग स्थिति की वजह बढ़ता एनपीए है, जो भारत में 30 जून तक 8.42 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसमें कहा गया है कि भारत के लिए रिकवरी करना अन्य के मुकाबले अधिक कठिन होगा।
बैंकिंग सिस्टम का विश्लेषण
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बैंकिंग सिस्टम में रिकवरी के साइज का अनुमान लगाने के लिए ग्लोबल लेवल पर 20 सबसे बड़ी बैंकिंग सिस्टम का विश्लेषण किया है। इसके लिए बैंकों के अधिकार क्षेत्रों को तीन ग्रुप प्रारंभिक-एक्सटीरियर, मिड-एक्सिटर और लेट-एक्सिटर में डिवाइड किया गया, जो प्री-कोविड की स्थिति के अनुमानित रिकवरी पर आधारित हैं। इसमें भारतीय बैंकिंग सिस्टम को लेट-एक्सिटर के तौर पर कंसीडर किया गया है।
कोरोना का बढ़ता प्रकोप
कोरोना के लिए मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था का भारी झटका लगा है। हालांकि, महामारी की रफ्तार अभी भी बेकाबू है। covid19india.org के मुताबिक 25 सितंबर तक भारत में कोरोना के कुल मामले 58 लाख के पार पहुंच चुका है। वहीं कोरोना के कारण 92,347 लोगों की जान जा चुकी है। दुनियाभर में कोरोना का मामला 3.24 करोड़ के स्तर को पार कर चुका है।
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