हेटस्पीच के मामले में बाहरी एजेंसी करेगी फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर का ऑडिट, विज्ञापनदाताओं के बायकॉट के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सहमत हुए
अब इंडिपेंडेंट ऑडीटर यह देख सकेंगे कि फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर हेट स्पीज जैसे नुकसानदेह कंटेंट को कैसे हैंडल करते हैं। तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इसके लिए सहमत हो गए हैं। कुछ समय पहले नुकसानदेह कंटेंट के मुद्दे को लेकर प्रमुख विज्ञापन एजऐंसियों ने इनका बायकॉट कर दिया था।
वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एडवर्टाइजर्स (डब्ल्यूएफए) ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ हुए इस सौदे की घोषणा की। एक साल से ज्यादा समय से इस सौदे पर वार्ता हो रही थी। सौदे के तहत एक इंडिपेंडेंट ऑडीटर यह देखेगा कि ये प्लेटफॉर्म्स नुकसानदेह सामग्रियों की कैटेगराइजिंग, रिपोर्टिंग और एलीमिनेटिंग किस तरह से करते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नुकसानदेह सामग्री विज्ञापन के ठीक बगल में न लगी हुई हो।
विज्ञापन के बगल में लगने वाली सामग्री पर विज्ञापनदाताओं का ज्यादा नियंत्रण होगा
सौदे का लक्ष्य इस साल के आखिर तक यह ऑडिट कराने का है या इसे लागू करने की कार्ययोजना तैयार कर लेने का है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ऐसे सिस्टम बनाएंगे, जिससे कि विज्ञापन के बगल में लगने वाली सामग्री पर विज्ञापनदाताओं का ज्यादा नियंत्रण हो। विज्ञापनदाता वर्षों से यह शिकायत कर रहे थे कि सोशल मीडिया पर उनके विज्ञापन नस्लवादी या हिंसक कंटेंट के बगल में लगा दिए जाते हैं।
पिछले साल गूगल के यूट्यूब को विज्ञापनदाताओं के व्यापक बायकॉट का सामना करना पड़ा था
पिछले साल गूगल के यूट्यूब को विज्ञापनदाताओं के व्यापक बायकॉट का सामना करना पड़ा था। लेकिन जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद चिंता और बढ़ गई। जुलाई में दुनियाभर की दर्जनों बड़ी कंपनियों ने महीनेभर तक फेसबुक का बायकॉट किया था और फेसबुक पर आरोप लगाया था कि वह हेटस्पीच और मिसइनफोर्मेशन से निपटने में हमेशा असफल रहती है।
काफी कुछ और किया जाना बाकी है
मार्स के ग्लोबल रिस्पांसिबल मार्केटिंग ऑफीसर जैक्वी स्टीफेंसन ने कहा कि यह किसी जीत की घोषणा नहीं है। काफी कुछ और किया जाना है। यूनीलिवर के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट फॉर ग्लोबल मीडिया लूई डि कॉमो ने कहा कि बदलाव रातभर में नहीं हो जाता है। फिर भी यह सही दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।
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