कोरोनावायरस महामारी के दौरान बड़ा संकट झेलने वाले रियल एस्टेट सेक्टर के लिए 2021 उम्मीदों भरा साल हो सकता है। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि कम ब्याज दरों के कारण बीते 2-3 महीनों में आया बूम अगले साल भी जारी रह सकता है। रियल्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना के बाद लोग अपना घर खरीदने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। इस कारण भी रेजिडेंशियल सेगमेंट में अच्छी मांग रह सकती है।
हाईवे और एक्सप्रेस-वे के आसपास नए प्रोजेक्ट से बढ़ेगी मांग
कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CREDAI) के वेस्टर्न यूपी के सचिव सुबोध गोयल का कहना है कि बीते 2-3 महीनों में रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में बिक्री बढ़ी है और दोनों की मांग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। सुबोध के मुताबिक, यह वृद्धि अगले साल यानी 2021 में भी जारी रहेगी। सुबोध गोयल का कहना है कि देश में हाईवे और एक्सप्रेस-वे के आसपास बड़ी इंफ्रा परियोजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा शहरी विकास ने नए रियल्टी डेस्टिनेशन बनाए हैं। इस कारण यहां रोजगार के ज्यादा मौके होंगे। ज्यादा रोजगार के कारण यहां स्टैंडर्ड लिविंग के साथ शॉपिंग स्पेस की मांग में बढ़ोतरी होगी।
कोविड-19 के बाद घर खरीदना सबसे बड़ी प्राथमिकता
CREDAI के सचिव का कहना है कि कोविड-19 के बाद अपना घर खरीदना लोगों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। कम ब्याज दर और अन्य लाभ के कारण भी लोग अपना घर खरीदने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। सुबोध के मुताबिक, वर्क फ्रॉम होम एक इमर्जिंग वर्क कल्चर बन गया है जो लक्जरी सेगमेंट को अपने में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करेगा। CREDAI के सचिव का कहना है कि यदि सरकारें स्टांप ड्यूटी में कटौती करें तो मांग और बेहतर हो सकती है।
30% से ज्यादा मांग रहने की उम्मीद
दिल्ली-NCR की प्रमुख रियल एस्टेट ब्रोकरेज कंपनी ब्लू सैफायर इंफ्रास्ट्रक्चर के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर अरुण वर्मा का कहना है कि 2019 की अंतिम तिमाही और 2020 की पहली तिमाही में रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में बेहतर मांग थी। लेकिन कोरोना के कारण अप्रैल से लगातार दो तिमाही में मांग प्रभावित रही। बीते 3-4 महीनों में एक बार फिर मांग बढ़ी है। उन्होंने 2021 में रेजिडेंशियल और कमर्शियल सेगमेंट में कम से कम 30% ज्यादा मांग रहने की उम्मीद जताई। वर्मा का कहना है कि अफोर्डेबल हाउसिंग के साथ अब लग्जरी सेगमेंट में भी मांग बढ़ रही है। इसके अलावा निवेशक भी अब रियल एस्टेट सेक्टर का रूख कर रहे हैं। इससे भी अगले साल बेहतर मांग रह सकती है।
माइक्रो मार्केट में रोजगार बढ़ने से रेजिडेंशियल यूनिट्स की डिमांड बढ़ी
निराला वर्ल्ड के सीएमडी सुरेश गर्ग का कहना है कि प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक और संस्थागत क्षेत्र में निवेश ने माइक्रो मार्केट में बेहतर रोजगार की संभावनाएं पैदा की हैं। इससे रेजिडेंशियल यूनिट्स की डिमांड बढ़ी है। हाउसिंग फॉर आल और PMAY के लाभ ने लॉकडाउन के बाद बड़ी संख्या में खरीदारों को आकर्षित किया है। त्योहारी सीजन में अच्छी सेल्स के बाद उम्मीद की जा रही है कि नए साल लोग किराए पर रहने की जगह खुद का घर खरीदने को प्राथमिकता देंगे। नए साल में अफोर्डेबल हाउसिंग में बेहतर रिकवरी रह सकती है।
कोरोना महामारी ने घर की अहमियत समझाई
अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के सीएमडी राकेश यादव का कहना है कि कोरोना कोरोना महामारी ने घर की अहमियत को समझाया है। अब हर किसी का घर ही ऑफिस भी बन गया है। इसके चलते घर खरीदारों के सेंटीमेंट्स, पंसद और साइज में बड़ा बदलाव आया है। सोशल डिस्टेंसिंग ने हाउसिंग सोसाइटी के अहमियत को समझाया है। हाउसिंग सोसाइटी में रेजीडेंट्स के लिए उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं के कारण लोगों के अंदर टाउनशिप में बसने की इच्छा और प्रगाढ़ हुई है। इसका चलते त्योहारी सीजन में मांग तेजी से बढ़ी है। अगले साल आवासीय प्रॉपर्टी ही रियल एस्टेट मार्केट को आगे ले जाने का काम करेगा। राकेश यादव ने अगले साल आवासीय प्रॉपर्टी मार्केट में 20 से 25% तक ग्रोथ की उम्मीद जताई।

अगले साल भी जारी रहेंगे ऑफर
लॉकडाउन के बाद बिक्री बढ़ाने के लिए डेवलपर्स ने ग्राहकों के लिए ऑफर्स की बरसात कर दी थी। इससे डेवलपर्स को फायदा भी हुआ और बीते 2-3 महीनों में रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में बिक्री में तेजी आई है। प्रॉपर्टी कंसलटेंट एनरॉक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के टॉप-7 शहरों में रेजिडेंशियल सेगमेंट में 6,38,020 यूनिट्स स्टॉक में हैं। अरुण वर्मा का कहना है स्टॉक को निकालने के लिए डेवलपर अगले साल भी ऑफर जारी रखेंगे। यह ऑफर्स कम से कम 2021 की पहली छमाही तक जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, मांग बढ़ने पर ऑफर्स में कमी आ सकती है।
रेजिडेंशियल सेगमेंट में कीमतें स्थिर रह सकती हैं
ग्लोबल प्रॉपर्टी कंसलटेंट नाइट फ्रेंक की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में मुंबई, दिल्ली-NCR और बेंगलुरु समेत देश के प्रमुख शहरों में रेजिडेंशियल सेगमेंट में प्रॉपर्टी की कीमतें स्थिर रह सकती हैं। हालांकि, लॉकडाउन के बाद अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर खुलने से हाई नेटवर्थ वाले विदेशी निवेशकों का रास्ता साफ हो गया है जो 2020 में पूरी तरह से गायब थे। विदेशी निवेशकों के लौटने से कीमतों में मामूली तेजी आ सकती है।
वित्त वर्ष 2022 में मुख्य ब्याज दर घटने की उम्मीद नहीं
एम्के ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची ब्याज दर के कारण वित्त वर्ष 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास मुख्य ब्याज दर में कटौती करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2021 तक महंगाई दर 5.8% के आसपास पहुंचेगी। कारोबारी साल 2022 में यह और घटकर 4.8% पर आ जाएगी। ब्रोकरेज कंपनी का कहना है कि विकास से जुड़ी चिंता और सरकार की कम खर्ची के कारण मौद्रिक नीति समिति (MPC) का रुझान नरम और बाजार में पर्याप्त नकदी बनाए रखने वाला रहेगा। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि अगले साल होम लोन की ब्याज दरों में ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है।
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