कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने सरकार से आग्रह किया है कि बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स (NPA) की समस्या से निपटने के लिए कई बैड बैंक खोलने पर विचार करे। इंडस्ट्री बॉडी का कहना है कि NPA से पब्लिक सेक्टर बैंकों के प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और कोरोना महामारी के दौरान यह समस्या और बढ़ी है।
NPA खरीदने में FPI को शामिल करने पर विचार हो
सरकार को भेजे प्री-बजट मेमोरेंडम में CII ने कहा है कि सरकार को NPA खरीदने में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) को शामिल करने पर विचार करना चाहिए। CII के प्रेसीडेंट उदय कोटक का कहना है कि कोविड-19 के बाद बाजार निर्धारित मूल्य खोज के माध्यम से एक रेजोल्यूशन मैकेनिज्म तलाशना काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि घरेलू और ग्लोबल स्तर पर भारी लिक्विडिटी के कारण कई बैड बैंक NPA की समस्या से निपट सकते हैं। इससे बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट साइकल भी लौट आएगा।
मजबूत तंत्र से प्रोत्साहित होंगे बैंक
उदय कोटक का कहना है कि बाजार आधारित मजबूत तंत्र से पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) अपने बैड लोन बेचने के लिए प्रोत्साहित होंगे। साथ ही बैंकों को बाद में उठने वाले सवालों का डर भी नहीं रहेगा। साफ-सुथरी बैलेंस शीट होने के कारण PSB बाजार से नई कैपिटल जुटाने के योग्य हो जाएंगे। इससे सरकार की बैंकों में री-कैपिटलाइजेशन की आवश्यकता कम हो जाएगी।
तीन साल में सरकार ने बैंकों को 2.58 लाख करोड़ रु. दिए
सरकार ने बीते तीन सालों PSB को 2.58 लाख करोड़ रुपए री-कैपिटलाइजेशन के तौर पर दिए हैं। सरकार ने वित्त वर्ष 2018 में 80 हजार करोड़ रुपए, वित्त वर्ष 2019 में 1.08 लाख करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2020 में 70 हजार करोड़ रुपए का री-कैपिटलाइजेशन किया है। सितंबर 2020 में संसद ने PSB में 20 हजार करोड़ रुपए के कैपिटल इन्फ्यूजन को मंजूरी दी है।
अभी ARC को बेचे जाते हैं अधिकांश NPA
अभी तक अधिकांश NPA असेट री-कंस्ट्रक्शन कंपनीज (ARC) को बेचे जाते हैं। ARC के पास सीमित कैपिटल होने के कारण यह बिक्री कैश के आधार पर ना होकर सिक्युरिटी रिसिप्ट (SR) के आधार पर होती है। SR एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट होता है जिसके तहत भुगतान रिकवरी के आधार पर तय होता है। इसका मतलब यह है कि SR में सेल प्राइस एक असली सेल नहीं होती है।
ARC का रिकवरी रेट काफी क
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डाटा के मुताबिक, ARC का रिकवरी रेट 10-12% की रेंज में है जोकि काफी कम है। मौजूदा समय में SR के आधार पर बैंकों की 1.46 लाख करोड़ रुपए की आउटस्टैंडिंग है। रिकवरी रेट कम होने के कारण SR बैंकों के लिए काफी आकर्षक नहीं है। CII का कहना है कि FPI और AIF के इसमें शामिल होने के कारण रिकवरी रेट में सुधार हो सकता है।
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