लॉकडाउन के कारण इस साल देश सहित दुनियाभर में आर्थिक संकट के बादल छाए रहे। इसके उलट घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों की संख्या में लगातार बढ़त दर्ज की गई। सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के मुताबिक इस साल अप्रैल से सितंबर महीने के दौरान 63 लाख नए डीमैट अकाउंट खोले गए। जबकि पिछले साल इसी अवधि में 27 लाख नए डीमैट अकाउंट खोले गए थे। यानी सालाना आधार पर इसमें 133% की ग्रोथ देखने को मिली।
शेयर बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर नए निवेशकों की इंट्री
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-सितंबर के दौरान औसतन हर महीने 10 लाख से अधिक नए डीमैट अकाउंट खोले गए। सेबी के मुताबिक देश में अब कुल 4.44 करोड़ डीमैट अकाउंट हैं। जबकि मार्च को समाप्त पिछले वित्त वर्ष में डीमैट अकाउंट की कुल संख्या 3.59 करोड़ रही थी।
महिलाओं की हिस्सेदारी
इस साल खोले गए कुल डीमैट अकाउंट में महिलाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी जिरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ ने एक मीडिया वेबसाइट से बातचीत में बताया कि नए निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 वायरस के शुरुआत से अबतक कंपनी के साथ 15 लाख से अधिक नए निवेशकों ने अकाउंट खोले, जिसमें से 2.35 लाख अकाउंट महिलाओं ने खोले। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की उम्र औसतन 33 साल है।
नए डीमैट अकाउंट में रिकॉर्ड बढ़त क्यों?
- लॉकडाउन
- शेयरों की कीमत बेस प्राइस से नीचे
- अन्य के मुकाबले शेयर बाजार में बेहतर रिटर्न की संभावना
- डीमैट अकाउंट खोलने की प्रक्रिया में आसानी
मार्च के अंत से लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण बेहतर रिटर्न और निवेश के लिए निवेशकों ने शेयर बाजार को चुना। क्योंकि बाजार में रिकॉर्ड गिरावट से शेयरों की वैल्यू औसत से नीचे आ गई थी। ऐसे में इक्विटी रिटर्न, बैंक डिपॉजिट या अन्य के मुकाबले बेहतर रहने की ज्यादा संभावना रही।
मोतीलाल ओसवाल के इक्विटी स्ट्रेटेजी हेड हेमांग जानी ने कहा कि मार्च की गिरावट से शेयरों के भाव बेस प्राइस से कम हो गए थे। ऐसे में निवेशकों के लिए निवेश का यह सबसे अच्छा मौका रहा। उन्होंने बताया कि पहली छमाही में टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में रिटेल निवेशकों की संख्या बढ़ी, क्योंकि उनमें निवेश को लेकर सही जानकारी पहले की तुलना में बढ़ी है।
निवेशकों ने कहां किए निवेश
लॉकडाउन के दौरान खुल नए डीमैट अकाउंट से ज्यादातर खरीदारी क्वालिटी शेयरों में की गई। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत सामान्य स्तर से नीचे आ गई थी। हालांकि यह ट्रेंड में बदलाव भी देखने को मिला। कैपिटलवाया (CapitalVia) ग्लोबल रिसर्च के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने बताया कि रिटेल निवेशकों ने निवेश के लिए रियल्टी शेयरों के साथ-साथ मेटल, सरकारी बैंक और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर्स के शेयरों को ज्यादा पसंद किया।
नए अकाउंट ज्यादा खुलने से बाजार पर असर
बाजार बीते सात हफ्तों से बढ़त के साथ बंद हो रहा है। इस दौरान सेंसेक्स ने 47 हजार और निफ्टी ने 13,700 के रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। इसमें विदेशी निवेश के साथ घरेलू निवेशकों का सपोर्ट मिला। पहले की तुलना में घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) की हिस्सेदारी बढ़ी। बाजार के जानकारों के मुताबिक रिटेल निवेशक अब म्युचुअल फंड के अलावा क्वालिटी शेयरों में पैसा लगा रहे हैं। यही कारण रहा कि सितंबर में रिलायंस का शेयर का भाव 2368 रुपए के स्तर पर पहुंच गया था, जो अभी 1939 रुपए के भाव पर कारोबार कर रहा है।
म्यूचुअल फंड्स की स्थिति
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड इन इंडिया (एम्फी) के मुताबिक म्युचुअल फंड सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) अकाउंट की कुल संख्या नवंबर माह तक 3.41 करोड़ हो गई है। इस साल नवंबर तक निवेश का यह आंकड़ा कुल 62,929 करोड़ रुपए तक हो गया। इसमें अप्रैल-सितंबर के दौरान कुल 47,827 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। यह पिछले साल की समान अवधि में 49,361 करोड़ रुपए था।
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