पूंजी बाजार रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ICICI बैंक के नए ED संदीप बत्रा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट सुनवाई के लिए पिटीशन फाइल किया है। इस मामले में 6 जनवरी को सुनवाई होगी। सेबी के इस कदम को बाजार में बुरे कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
परसों ही नियुक्ति को मंजूरी मिली थी
बता दें कि परसों ही भारतीय रिजर्व बैंक ने संदीप बत्रा को ICICI बैंक के नए ED के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी थी। इसके तुरंत बाद सेबी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई। कोर्ट में इस समय छुट्टी है, बावजूद इसके सेबी ने इसे अर्जेंट मामला बताकर दायर करा दिया।
2010 का है मामला
बता दें कि दरअसल साल 2010 में बैंक ऑफ राजस्थान के मामले में संदीप बत्रा पर सेबी ने 2 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई थी। उस समय बैंक ऑफ राजस्थान का आईसीआईसीआई बैंक में विलय हो गया था। सेबी ने आरोप लगाया कि बत्रा के पास कुछ सेंसिटिव जानकारी थी जिसके आधार पर उन्होंने शेयरों की खरीद बिक्री की और कमाई की। यह मामला सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (सैट) में गया।
अक्टूबर में सेबी का ऑर्डर खारिज हुआ
सैट ने इस मामले में सुनवाई की और पिछले साल अक्टूबर में सेबी को चेतावनी दी। सैट ने कहा कि मामला केवल 2 लाख रुपए से जुड़ा है जबकि बत्रा ने कुछ हजार रुपए ही कमाए हैं। ऐसे में यह कोई बड़ा मामला नहीं है और इस आधार पर किसी के करियर को खत्म नहीं कर सकते हैं। सैट ने बत्रा को चेतावनी दी और इसके बाद मामले को खारिज कर दिया।
आरबीआई की मंजूरी मिली
उसके बाद बत्रा ने भारतीय रिजर्व बैंक में अपना नाम क्लीयर करा लिया और परसों ही रिजर्व बैंक ने उनके नाम को ईडी के रूप में मंजूरी दे दी। वे इससे पहले बैंक में प्रेसीडेंट थे। जैसे ही इस मंजूरी की खबर सेबी को मिली सेबी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई। जबकि सैट के ऑर्डर को सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में कोई चुनौती नहीं दी थी। बैंक ऑफ राजस्थान के मामले के कारण बत्रा को पिछले 10 सालों से कोई प्रमोशन नहीं मिला है। उन्हें 2018 में ही ईडी बन जाना चाहिए था पर सेबी ने मामले में अड़ंगा लगा रखा था।
पिछले साल आरबीआई ने खारिज किया था
बता दें कि इससे पहले पिछले साल नवंबर में रिजर्व बैंक ने बत्रा की नियुक्ति को खारिज कर दी थी। उस समय बैंक के बोर्ड ने बत्रा को ईडी नियुक्त किया था। रिजर्व बैंक ने कहा था कि सेबी के मामले का प्रपोजल एक साल बाद सबमिट करें। सेबी ने सितंबर 2019 में 2 लाख रुपए की फाइन लगाई थी। संदीप बत्रा बैंक से पहले आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ में ईडी थे। बाजार के जानकारों के मुताबिक सेबी आईसीआईसीआई बैंक के खिलाफ जो कार्रवाई कर रही है वह गलत है।
सेबी ने पहले भी कार्रवाई की
इससे पहले सेबी ने आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आईपीओ के मामले में आईसीआईसीआई म्यूचुअल फंड पर भी पेनाल्टी लगाई थी। यह पेनाल्टी बहुत ही गलत तरीके से लगी थी। सेबी का आरोप था कि म्यूचुअल फंड ने आईपीओ में अंतिम दिन पैसे लगाकर आईपीओ को पार लगाया, जबकि अंतिम दिन कई म्यूचुअल फँड ने आईपीओ में पैसे लगाए थे। यही नहीं, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड पिछले 20 सालों से किसी भी आईपीओ में अंतिम दिन ही पैसे लगाता है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक पनामा पेपर्स जैसे मनी लांड्रिंग के मामले में सेबी ने 2016 से कोई काम नहीं किया। जबकि इस तरह के मामले में सेबी छुटि्टयों के दिन भी कोर्ट में अर्जेंट हियरिंग के लिए चली गई। इस तरह के सेबी के कदम सही नहीं हैं।
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